संत पीपा जी

जन्म- गागरोण दुर्ग (झालावाड़) चैत्र पूर्णिमा 1380 वि. स. (खींची, चौहान वंश)।
पिता का नाम – कड़ावाराम
माता का नाम – लक्ष्मीवती
संत पीपाजी का वास्तविक नाम – प्रतापसिंह,
गुरू का नाम – रामानन्द ।

संत पीपा दर्जी समाज के आराध्य देव थे ।
संत पीपा नेदिल्ली के फिरोजशाह तुगलक को हराया 1

संत पीपा राजस्थान में भक्ति आन्दोलन (निर्गुण भक्ति) के प्रवर्तक है ।

संत पीपा को श्री हरि का साक्षात् दर्शन द्वारिकाधीश मंदिर में हुआ।

संत पीपा का मंदिर – समदड़ी (बालोतरा),
◆ मेला- चैत्र शुक्ल पूर्णिमा।

संत पीपा की गुफा – टोडा, टोंक (मृत्यु-वि.स. 1441)।

संत पीपा की छतरी – गागरोण (झालावाड़), काली सिन्ध नदी के किनारे

संत पीपा छतरी में पीपा के चरण चिह्नों की पूजा होती है।

टोडा के राजा शूरसेन ने पीपा से प्रभावित होकर अपना पूरा धन साधू-संतों में बाँट दिया था।

◆ ग्रंथ – 1. पीपा परची 2. चितावनी 3. पीपा की कथा / वाणी

प्र:- संत पीपाजी का वास्तविक नाम क्या था ?
(1) प्रतापसिंह✅
(2) उदयसिंह
(3) रामसिंह
(4) अमितसिंह

प्र:- संत पीपाजी की छतरी कहाँ है ?
(1) पीपाड़ सिटी
(2) समदड़ी
(3) गागरोन✅
(4) फलौदी

  1. ↩︎